फिर से जाग उठी है आज, ज़िन्दगी जीने की तम्मना.
बहुत दिनों के विराम के बाद, कुछ कर दिखाने की तम्मना.
जाने कहाँ हुई थी गलती, जो हम रुक गए,
किया है जब फैसला तो फिर, क्यों कदम रुक गए.
शायद कुछ था मेरे और कुदरत के बीच बाकी.
जो उसने मुझे सोचने का एक मौका तो दिया,
की देखो तुम कहा हो आज और आजतक तुमने है क्या किया,
हुआ जब खुद से रु ब रु, तो मै सहम सा गया था,
फिर उस दिन से हुआ मेरी, कहानी का आगाज़ कुछ नया सा.
ठान चुका हु अब तो दिल, बहुत बड़ा है मेरा सपना,
फिर से जाग उठी है आज, ज़िन्दगी जीने की तम्मना.
राहें हैं तो मंजिले भी होंगी, और मंजिले है तो मुश्किलें भी
कभी सुहानी शाम होगी, तो कभी कदम कदम पर अट्खले भी,
अपने अपने मन की है सोच, नहीं होता हर वक़्त एक सा,
जो दिख रहा है तुमको पत्थर तुम्हारी राह का,
वो तो बस एक अल्प विराम है तुम्हारे लेख का,
बस फैसला है तुमको करना, की क्या यही पर है रुकना,
या जाना है उन उचाइयो पर, जहाँ आगमन होगा तुम्हारे नए कल का.
छोड़ दिया है खुदको आज, उड़ने के लिए उन उचाईयों तक,
जिऊंगा उस सुनहरे कल को, बस इंतज़ार है उस पल का ,
आया है फिर से आत्मबल मुझमे, बहुत बड़ा है मेरा सपना
फिर से जाग उठी है आज, ज़िन्दगी जीने की तम्मना.
बहुत दिनों के विराम के बाद, कुछ कर दिखाने की तम्मना.
जाने कहाँ हुई थी गलती, जो हम रुक गए,
किया है जब फैसला तो फिर, क्यों कदम रुक गए.
शायद कुछ था मेरे और कुदरत के बीच बाकी.
जो उसने मुझे सोचने का एक मौका तो दिया,
की देखो तुम कहा हो आज और आजतक तुमने है क्या किया,
हुआ जब खुद से रु ब रु, तो मै सहम सा गया था,
फिर उस दिन से हुआ मेरी, कहानी का आगाज़ कुछ नया सा.
ठान चुका हु अब तो दिल, बहुत बड़ा है मेरा सपना,
फिर से जाग उठी है आज, ज़िन्दगी जीने की तम्मना.
राहें हैं तो मंजिले भी होंगी, और मंजिले है तो मुश्किलें भी
कभी सुहानी शाम होगी, तो कभी कदम कदम पर अट्खले भी,
अपने अपने मन की है सोच, नहीं होता हर वक़्त एक सा,
जो दिख रहा है तुमको पत्थर तुम्हारी राह का,
वो तो बस एक अल्प विराम है तुम्हारे लेख का,
बस फैसला है तुमको करना, की क्या यही पर है रुकना,
या जाना है उन उचाइयो पर, जहाँ आगमन होगा तुम्हारे नए कल का.
छोड़ दिया है खुदको आज, उड़ने के लिए उन उचाईयों तक,
जिऊंगा उस सुनहरे कल को, बस इंतज़ार है उस पल का ,
आया है फिर से आत्मबल मुझमे, बहुत बड़ा है मेरा सपना
फिर से जाग उठी है आज, ज़िन्दगी जीने की तम्मना.